सबसे पहले स्वयं की मदद करना सीखें ....
जॉर्डन . बी पीटरसन अपने पेशे से साइकोलॉजिस्ट हैं और वह अपने मौजूदा समय में यूट्यूब पर देखे जाने वाले बुद्धिजीवियों में बेशुमार हैं । उनकी किताब। ' 12 रूल्स फॉर लाइफ ' सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में से एक है । जो अराजकता के विरुद्ध व्यवस्था की तालाश करना सिखाती है।
अपने को अच्छे से ट्रीट करना सीखें ...
जॉर्डन पीटरसन के 12 नियमों में से सबसे पहले यह जरूरी है कि स्वयं को बेहतर ढंग से ट्रीट करें ? बेहतर ढंग यानि किस तरह ? वास्तव में स्वयं को इस तरीके से ट्रीट करें जैसे आपको किसी व्यक्ति की मदद करने की भार सौंपी गई हो । और वह व्यक्ति स्वयं आप हो । सभी नियमों में से यह खास है कि सबसे पहले स्वयं की मदद करना सीखें ।
अर्थपूर्ण की तालाश करें ...
जीवन में दो प्रकार की खोज होती है । पहला ये जो उपयोगी हो और दूसरा ये जो "अर्थपूर्ण " हों। उपयोगी खोज से जीवन बेहतर बनता है और अर्थपूर्ण खोज से जीवन का कद ऊपर की ओर बढ़ते जाता है । अमूमन सभी अपने जीवन उपयोगी उपायों को खोज तो लेते है लेकिन जीवन को अर्थपूर्ण बना पाना ही सफल लोगों को दूसरों से अलग करता है ।
तुलना का पैमाना बदलें ....
तुलना करना बुरी बात नहीं है । इससे पहले हमारी तुलना का पैमाना सही हो । कभी भी स्वयं की तुलना इससे न करें कि कोई व्यक्ति आज किस स्थिति में है हमेशा स्वयं की तुलना इससे करें कि अतीत में आप किस स्थिति में थे । आपका विकास का पैरामीटर बीते दिनों की तुलना में केवल एक ही है और ऐसा इसलिए कि पिछले दिनों के मुकाबले जितना आपने मेहनत किया है उसी के अनुसार आपकी ग्रोथ हुई है ।
औरों को कम न आंके ....
खुद को हमेशा बेहतर बनाने की राह में आप इस घेरे में फंस सकते हैं जिसमें आप ये मान बैठे हैं कि हम औरों से बेहतर हैं । हालांकि बहुत संभव है कि किसी व्यक्ति के पास आपको अंदर के गुण को बताने के लिए कुछ ऐसा हो । जिसकी कल्पना आजतक आपने भी नहीं की थी । यदि आप दूसरों से कुछ सीखना चाहते हैं तो खुद को हमेशा यह मानकर चलें कि दूसरे आपसे ज्यादा जानते हैं।
स्वयं से शुरुआत करें ....
जब आप लोगों की आलोचना इस बात पर कर रहे होते हैं कि वह अपने जीवन में अस्त व्यस्त है तो यह तभी पॉसिबल है जब आपने पहले अपने घर को अच्छे से सजा संवार रखा है । इसी तरह दूसरों की आलोचना करने में समय जाया करने का तबतक कोई फायदा नहीं । जबतक कि वे बुराइयां खुद के अंदर हो । इसलिए पहले स्वयं से शुरुआत करें और अपने भीतर की बुराइयों को पहले त्याग करना सीखें । आप चाहकर भी किसी और से शुरू नहीं कर सकते ।
अच्छे दोस्तों को ढूंढे ....
जीवन में बहुत कुछ इस पर निर्भर करता है कि आपके आसपास किस तरह के लोग रहते हैं । उनलोगों से दोस्ती करें जो हमेशा आपके लिए सबसे बेहतर चाहते हैं ऐसे लोगों से दोस्ती बिल्कुल भी न करें जो आपके भीतर नाकरात्मकता से भरकर आत्मसंतुष्टि पाना चाहते हों । पॉजिटिव एनर्जी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक स्थानांतरित होती है । इसलिए जीवन में अच्छे दोस्तों को ढूढना बहुत जरूरी है।
स्वयं के प्रति ईमानदार रहें ....
हमेशा सच बोलने की कोशिश करें। इससे पहले यह जरूरी है कि कभी भी झूठ न बोलें । सच न बोलना और झूठ बोलना दो अलग - अलग बातें हैं। क्योंकि झूठ बोलकर आप एक वहम पैदा करते हैं । सफलता की यात्रा झूठ की बुनियाद पर तय नहीं की जा सकती । इसीलिए स्वयं के प्रति ईमानदार रहना इस यात्रा का पहला पड़ाव है।
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