आइए जानते हैं कि ट्रांसफार्मर का आर्मेचर नर्म लोहे से बनाने की वजह क्या है ? इसका मुख्य कारण , नर्म लोहा उच्च प्रतिरोधकता ( resistivity ) और कम विद्युत घटक प्रतिशत वाला धातु होता है । इससे ट्रांसफार्मर का आर्मेचर कम घटकों के बीच विद्युत संचार सुनिश्चित करने के लिए उपयोग में लिया जाता है।
नर्म लोहे की प्रतिरोधकता उच्च होने के कारण इसके आर्मेचर में बराबर तड़क जगहों के बीच कम संवेदकता होता होती है । इससे आर्मेचर आवेशी विद्युत तीव्रता ( magnetic flux intensity ) को कम करने के लिए तत्पर रहता है और संचार विधि को सुनिश्चित करता है ।
इसके साथ ही , ट्रांसफार्मर में विद्युत गति के कारण ऊर्जा का कुछ भाग लुप्त होता है , जिसे हिस्टेरिसिस लॉस कहा जाता है । यह लॉस नर्म लोहे में कम होता है । जिससे आर्मेचर की क्षमता की नुकसानी कम होती है और ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जाता है।
नर्म लोहा बनाने की विधि :-
नर्म लोहा या संगमरमर लोहा बनाने की प्रक्रिया में विभिन्न चरण होते हैं। निम्नलिखित हैं इन चरणों का विवरण:
1. मैग्नीज अयस्क की प्राकृतिक विश्लेषण: पहले तो मांगनीज अयस्क को भूमिका के अनुसार प्राकृतिक तत्वों से अलग किया जाता है। यह निष्कर्ष निकालने के लिए विभिन्न तकनीकों पर आधारित हो सकता है, जैसे कि लवणीय भंडारण (leaching), धुलाई, मैग्नेटिक आयस, या निधारित कर तथा ग्रेविटी सेपरेशन तकनीकों का उपयोग।
2. गुलाम बनाना: मैग्नीज अयस्क को उच्च तापमान पर वस्त्रित करके, बल्कि उसका गुलाम बनाया जाता है। इसके लिए तापमान मांगनीज तत्व के मेल्टिंग प्वाइंट से ऊपर जाना होता है।
3. गिरन का काम: बाद में, इस गुलाम को ऊर्जा के कारण ठण्डा करके इसे फेस्टूस के रूप में गिर दिया जाता है। गिरन से, अनचाहे तत्वों और दूषित माल का उत्पादन होता है जिसे साफ करने के लिए अलग किया जाता है।
4. स्लैग निकालना: जब नर्म लोहा बनाने के लिए सही मिलावट में तत्वों को शामिल किया जाए, तो प्रक्रिया में धातुओं और अनचाहे तत्वों (जैसे स्लैग) को भी हटाया जाता है। यह निकालने के लिए, एक प्रभासा ऑवन में गिरन का सामरिक उपयोग किया जाता है ताकि कच्चा पदार्थ और उष्ण अक्षम तत्व अलग कर सकें।
5. टेलर का काम: यह चरण लोहे को उच्च प्रतिरोधकता और उच्च इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी वाले नर्म लोहे में परिवर्तित करने के लिए होता है। यह उच्च विशेषता वाले नर्म लोहे को उत्पन्न करने में मदद करता है जो ट्रांसफार्मर के आर्मेचर के लिए उपयोगी होता है।
6. धातुरस की धूल निकालना: धातुरस की धुलाई को इस प्रकार किया जाता है कि धातु आपूर्ति तथा उपयोग में आवश्यक होने वाली कोई कड़ी नुकसान न हो मगर नर्म लोहे का क्षमता वृद्धि करता हुआ साफ बन सके।
इसके द्वारा जिक्र की गई विभिन्न प्रक्रियाएं नर्म लोहे के बनाने के लिए आमतौर पर उपयोग होती हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि इन प्रक्रियाओं का उपयोग उचित सुरक्षा और पर्यावरण स्थानांतरण मानदंडों का पालन करते हुए हो।
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